लक्सर। महाराजा भागीरथी विशाल सैनी सभा रजिस्टर्ड में जिला अध्यक्ष पद को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। पूर्व जिला अध्यक्ष बाबूराम सैनी ने संगठन के पदाधिकारियों पर बिना सूचना और बैठक के उन्हें पद से हटाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनकी जगह ईश्वर चंद सैनी को नया अध्यक्ष बना दिया गया। वहीं, ईश्वर चंद सैनी की ओर से बाबूराम सैनी पर संगठन के हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने से विवाद और गहरा गया है। इस पूरे मामले को लेकर बाबूराम सैनी के समर्थकों में नाराजगी है। मंगलवार को लक्सर-हरिद्वार रोड स्थित मुखिया होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में समर्थकों ने बाबूराम सैनी के पक्ष में आवाज बुलंद करते हुए अलग संगठन बनाने का समर्थन किया। इससे सैनी सभा में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
बिना बैठक पद से हटाने का आरोप, फैसले पर उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में बाबूराम सैनी ने कहा कि वह महाराजा भागीरथी विशाल सैनी सभा रजिस्टर्ड के जिला अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे। आरोप है कि संगठन के पदाधिकारियों ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना और बैठक के पद से हटा दिया। इसके बाद ईश्वर चंद सैनी को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। बाबूराम सैनी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन में महत्वपूर्ण पद से जुड़े फैसले नियमानुसार और संबंधित पदाधिकारियों को विश्वास में लेकर किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पदाधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत है तो उसे संगठन के सामने रखा जाना चाहिए और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। बिना सूचना और निर्धारित प्रक्रिया के पद से हटाने का फैसला स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पूरे मामले में संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
हिसाब-किताब के आरोपों से बढ़ी तकरार
संगठन में विवाद की दूसरी वजह हिसाब-किताब को लेकर लगाए गए आरोप हैं। ईश्वर चंद सैनी की ओर से बाबूराम सैनी पर संगठन के हिसाब-किताब में गड़बड़ी करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों से बाबूराम सैनी के समर्थक नाराज हैं। इससे पहले हिसाब-किताब को लेकर बैठक होने और उसमें स्थिति स्पष्ट किए जाने की बात भी बाबूराम सैनी की ओर से कही गई थी। उन्होंने आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखते हुए मामले को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर देखने की बात कही।
हालांकि, हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में ईश्वर चंद सैनी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। ऐसे में संगठन के भीतर चल रहे विवाद में दोनों पक्षों की बात और उपलब्ध दस्तावेज अहम होंगे।
नई संगठन बनाने के समर्थन में उतरे समर्थक
प्रेस वार्ता में बाबूराम सैनी के समर्थन में पहुंचे लोगों ने उनके साथ खड़े रहने की बात कही। समर्थकों ने कहा कि संगठन में किसी भी पदाधिकारी को हटाने या नया अध्यक्ष बनाने के मामले में नियमों का पालन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं तो पूरे मामले को पारदर्शिता के साथ सामने लाया जाना चाहिए।
समर्थकों ने बाबूराम सैनी के नेतृत्व में नया संगठन गठित करने के विचार का समर्थन किया। इससे विवाद अब केवल जिला अध्यक्ष पद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठन के भविष्य और उसके नेतृत्व को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है तो सैनी समाज के संगठनात्मक ढांचे पर इसका असर पड़ सकता है।
समाज की एकजुटता पर भी उठे सवाल
प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों ने कहा कि समाज की मजबूती उसकी एकजुटता में है। संगठन के पदों और हिसाब-किताब को लेकर पैदा हुए विवाद का समाधान आपसी बातचीत और नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। हालांकि, बाबूराम सैनी के समर्थन में जुटे लोगों की नाराजगी से साफ है कि विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।
प्रेस वार्ता में बाबूराम सैनी, सुभाष सैनी, ऋषिपाल सैनी, ज्ञानचंद सैनी, एडवोकेट वीरेंद्र सैनी, मांगेराम सैनी, गीता सैनी, रामधन सैनी, हरपाल सैनी, सुरेश राज सैनी और सुभाष सैनी सहित सैनी समाज के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
अब सवाल यह है कि जिला अध्यक्ष पद को लेकर उठे विवाद का समाधान संगठन के मौजूदा ढांचे में निकलेगा या बाबूराम सैनी के समर्थक अलग संगठन बनाकर नई राह चुनेंगे। फिलहाल, आरोप-प्रत्यारोप और नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान ने सैनी सभा के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है।

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